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फरवरी २०२०
चलें पालीताणा

पालिताणा (गुजरात) जैन धर्म के अनुसार प्राचीन काल से ही पालिताणा जैन साधुओं और मुनियों के मोक्ष एवं निर्वाण का प्रमुख स्थल रहा है, इसलिए पालिताणा जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, यह भावनगर जिले से ५० किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम 

जनवरी - २०२०
गुरुदेव श्रीमद् विजयराजेन्द्रसूरिश्वरजी

जन्मस्थान एवं माता-पिता-परिवार
‘श्रीराजेन्द्रसुरिरास’ एवं श्रीराजेन्द्रगुणमंजरी के अनुसार, वर्तमान राजस्थान प्रदेश के भरतपुर शहर में दहीवाली गली में पारिख परिवार के ओसवंशी श्रेष्ठि ऋषभदास रहते थे, आपकी धर्मपत्नी का नाम केशरबाई था, जिसे अपनी कुक्षि में श्री राजेन्द्र सुरि जैसे व्यक्तित्व को धारण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। श्रेष्ठि रुषभदास जी की तीन संतानें थीं, दो पुत्र : बड़े पुत्र का नाम माणिकचन्द एवं छोटे पुत्र का नाम रतनचन्द था एवं एक कन्या थी, 

दिसंबर-२०१९
आचार्य श्री नानालालजी म. सा. की संक्षिप्त जीवनी

अग्नि का छोटा-सा कण भी वृहत्काय घास के ढेर को क्षण भर में भस्मसात् कर देता है और अमृत का एक लघुकाय बिन्दु अथवा आज की भाषा में होम्योपैथिक की एक छोटी-सी पुड़िया भी अमूल्य जीवनदाता बन जाती है।
 

मोक्ष प्राप्ति के लिए सामायिक प्रतिक्रमण ही अमृत क्रिया है-आचार्य ऋषभचन्द्र सूरि

जावरा: दादा गुरूदेव के पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति श्रीमोहनखेडा तीर्थ विकास प्रेरक मानव सेवा के मसीहा, आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा का ऐतिहासिक मंगलमय प्रवेश, आचार्य पाट गादी पर विराजित होने के लिए हुआ।

जैन एकता को मिला प्रतिसाद आचार्य श्री महाश्रमणजी ने भगवान बाहुबली के किये दर्शन

दक्षिण के काशी गिने जाने वाले श्रवणबेलगोला में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य श्री महाश्रमणजी का अहिंसा यात्री के साथ भव्य स्वागत किया गया, इस अवसर पर श्रवणबेलगोला के प.पू. श्री चारूकिर्तीजी म.सा. ने भव्य स्वागत किया,

श्री जाखोड़ा तीर्थ

श्री शान्तिनाथ भगवान, पद्मासनस्थ, प्रवालवर्ण, लगभग ३५ सेमी., श्वेताम्बर मंदिर।

तीर्थस्थल : राजस्थान प्रांत के पाली मारवाड़ जिले में जवाई बांध रेल्वे स्टेशन से १० किमी, फालना से १८ किमी दूर है, सिरोही-साण्डेराव सड़क मार्ग पर शिवगंज से ९ किमी तथा सुमेरपुर से ७ किमी दूर जाखोड़ा गांव के पहाड़ी की ओट में यह तीर्थ स्थित है।

श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा जि. दुर्ग छत्तीसगढ

छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिला में जैन धर्मावलम्बियों का विश्व प्रसिद्ध श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ असंख्य श्रद्धालुओं के आस्था का केन्द्र है, यहाँ मूलनायक तीर्थपति २३ वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ प्रभु प्रतिष्ठित हैं। भूगर्भ से प्राप्त करीब २७५० वर्ष प्राचीन श्री उवसग्गहरं पार्श्व प्रभु की प्रतिमा अत्यंत ही मनोहारी है, एक सौ आ’ पार्श्वनाथ यात्रा क्रम में यह तीर्थ पूज्यनीय एवं वंदनीय है।

मई-२०१९
होली चातुर्मास पर जैन धर्म के आचार्य एवं संतों का मिलन
जिसमें आसमान को छूने का जज्बा होता है,

जमीन भी उसकी हो जाती है, वस्तुत: जो व्यक्ति कुछ होने की तमन्ना रखता है, कुछ कर गुजरने का हौसला रखता है, वह एक दिन अवश्य ही अपने भाग्य, बुद्धि और परिश्रम के बलबुते पर जनमानस के मानचित्र पर सफल व्यक्तित्व के रूप में उभर जाता है। विलक्षण कर्त्तृत्व और विशिष्ट व्यक्तित्व के धनी आचार्य महाश्रमण का जन्म वि.सं. २०१९ वैशाख शुक्ला ९ (१३ मई १९६२) रविवार को सरदाशहर में हुआ।

अप्रैल-२०१९
श्रवणबेलगोला जैन तीर्थ
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श्रवणबेलगोला मंदिर कर्नाटक

 श्रवणबेलगोला मंदिर कर्नाटक राज्य के हसन में स्थित एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ है, यह तीर्थ मैसूर से ८४ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, यहॉं का मुख्य आकर्षण गोमतेश्वर बाहुबलि स्तम्भ है, यह तीर्थ श्रवणबेलगोला गांव के पास तलहटी से १७८.४२ मीटर उँचे पर्वत पर स्थित है, जिसे विन्ध्यगिरी पर्वत कहते हैं।

अमृता फडणवीस ने ‘जितो उड़ान २०१९' ट्रेड फेयर का उद्घाटन किया
मुंबई:

जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जितो) १२वां स्थापना दिवस मनाने के लिए जितो मुंबई जोन, उसके ११ जितो चेप्टर और उसके सदस्यों ने मिलकर ‘जितो उड़ान २०१९’ का आयोजन किया। ३ दिन का यह ट्रेड फेयर और बिजनेस कॉन्क्लेव १५ से १७ मार्च २०१९ के दौरान मुंबई-गोरेगांव के नेस्को संकुल के दो लाख वर्गफीट क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

महाराष्ट्र की भूमि पर देखा गया राजस्थान
दिनांक २३ मार्च २०१९

दिनांक २३ मार्च २०१९ को ‘आपणों राजस्थान’ कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरूवात बड़े हर्षोल्लास व उमंग भरी रही, कार्यक्रम की शुरूवात नैनमल सुराणा फांउडेशन के ट्रस्टी श्री कैलाश सुराणा, सतीश सुराणा, सुमन अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया, सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रारंभ पाश्र्वगायक व संगीतकार रवि जैन ने गीत के माध्यम से किया, जिसमें उनका सहयोग दिया गायिका अर्चना जैन ने दिया, राजस्थानी महिला मण्डल की बच्चियों ने कथक नृत्य प्रस्तुत कर सभी को अपनी ओर आकर्षित कर किया।

ना देखा गया आजतक-ना ही सोचा गया आश्विरकार सम्पन्न हुआ २४ मार्च को आपणों राजस्थान का कार्यक्रम
दिनांक २४ मार्च :

दिनांक २४ मार्च को सुबह आयोजित विश्व प्रसिद्ध अमृतवाणी सत्संग के पश्चात अमृतवाणी प्रवर्तक आध्यात्मिक गुरू डॉ. श्री राजेन्द्र जी महाराज जी को ‘आपणों राजस्थान’ की तरफ राजस्थान रत्न से संस्थापक बिजय कुमार जैन जी द्वारा सम्मानित किया गया।