जैन मंदिर

जैन दर्शन का अभूतपूर्व प्रदर्शन द्वारा राजश्री पिक्चर्स जरूर देखें सोनी जी की नसियां

भारत के 13 प्रसिद्ध जैन मंदिर

कहते हैं हम चाहे कितने भी धनवान क्यों न हों, मगर मन की शांति के लिए मंदिर से अच्छी कोई और जगह नहीं होती. जैन धर्म दुनिया के सबसे प्राचीन धर्म में से है, जिसका संस्थापक ऋषभ देव को माना जाता है. ऋषभ देव जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे और भारत के चक्रवर्ती सम्राट भरत के पिता थे. दुनिया भर में जैन धर्म के लोग फैले हुए हैं और इसकी लोकप्रियता दुनिया भर में प्रख्यात है. तो आईये आज हम आपको भारत में बने कुछ प्रसिद्ध जैन मंदिरों के बारें मेंं बताते हैं:

इस मंदिर में एक ही पत्थर से बनी 56 फुट ऊंची गोमतेश्वर बाहुबली की मूर्ति को दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा माना जाता है. यह मंदिर कर्नाटक के मैसूर जिले में इन्द्रगिरि नामक पहाड़ी पर स्थित है. ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर गंग शासक के मंत्री चामुन्दराया ने 10वीं शताब्दी में बनवाया था. मान्यताएं यह भी कहती हैं कि बाहुबली जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ के पुत्र थे. यह जैन समुदाय का एक पवित्र स्थल माना जाता है.

यह दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर है, जो लाल किला और चांदनी चौक के समीप स्थित है. जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित इस मंदिर का निर्माण सन 1526 में हुआ था. इस मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया, इसलिए इसका नाम लाल मंदिर रखा गया था. यह मंदिर जैन श्रद्धालुओं के बीच में बहुत लोकप्रिय है.

दिलवाड़ा मंदिर राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू नगर में स्थित है. इसका निर्माण 11वीं और 13वीं सदी के बीच वास्तुपाल और तेजपाल नामक दो भाईयों ने कराया था. माउंट अबू पर स्थित इस मंदिर को राजस्थान का ताजमहल भी कहा जाता है. इस मंदिर के निर्माण में कुल 1500 कारीगर लगे थे, तब जाकर इस भव्य मंदिर का निर्माण 14 साल में हो पाया था. तत्कालीन समय के अनुसार इस मंदिर की लागत लगभग 12 करोड़ 53 लाख रुपय थी.

सोनगिरी शब्द का अर्थ ‘द गोल्डन पीक’ होता है. यह मंदिर ग्वालियर और झांसी के बीच में स्थित है. इसके पास में 77 सुंदर जैन मंदिर पहाड़ियों पर स्थित हैं. जैन अनुयायियों के लिए सोनगिरी मंदिर प्राथमिक तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यही वह जगह थी, जहां पंद्रह लाख अनुयायियों के साथ मोक्ष प्राप्त किया गया था. मंदिर में निर्मित भगवान चंद्रप्रभु की 11 फीट ऊंची प्रतिमा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है.

राजस्थान में बना भव्य रणकपुर जैन मंदिर, जैन धर्म के पांच प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है. इस मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में राणा कुंभा के शासनकाल में प्रारम्भ हुआ था. यह मंदिर जैन पंथ के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण मंदिर होने के लिए जाना जाता है, जोकि भगवान आदित्यनाथ को समर्पित है. इस मंदिर के परिसर में एक छोटा सा सूर्य मंदिर भी है, जिसकी देख-रेख उदयपुर के रॉयल परिवार ट्रस्ट द्वारा की जाती है.

गुजरात में स्थित अजीतनाथ जैन मंदिर शहर के प्राचीनतम जैन मंदिरों में से एक माना जाता है. 1121 में इस मंदिर का निर्माण चलुक्या के राजा कुमारपाला ने करवाया था. इस मंदिर में कार्तिक और चैत्र के महीने में हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए आते हैं.

शिखर जी मंदिर को लोग पारसनाथ मंदिर के नाम से भी जानते हैं. यह मंदिर झारखंड के गिरिडीह जिले के पारसनाथ पहाड़ियों पर स्थित है. ऐसा माना जाता है कि यहां जैन धर्म के 20 तीर्थंकरों और बहुत से संतों ने मोक्ष प्राप्त किया था. इसी वजह से इस जगह को तीर्थराज के रूप में भी जाना जाता है. यह मंदिर 200 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और 4430 फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थित है.

धर्मनाथ देसार जैन मंदिर केरल के कोचीन शहर में स्थित है. यह मंदिर जैन धर्म के भगवान धर्मनाथ को समर्पित है, जो तत्कालीन समय में पंद्रहवीं जैन तीर्थंकर माने जाते थे. यह जैन समुदाय के लोगों द्वारा निर्मित 100 साल पुराना मंदिर है. इसको पत्थर से बनाया गया है. इसमें सुंदर नक्काशीदार संरचनाएं भी मौजूद हैं, जो लोगों का मन मोहती हैं.

यह मंदिर संपूर्ण भारत में जैन धर्म के पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण बसवा निवासी श्री अमरचंद बिलाला ने कराया था. गंभीर नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में 24वें तीर्थंकर श्री वर्धमान महावीर जी की 29 फुट ऊंची मूर्ति विराजित है. ऐसी मान्यता है कि इस मूर्ति का निर्माण महावीर जी की 2500 वें वर्षगाठ में करवाया गया था.

पार्श्वनाथ मंदिर का निर्माण 10वी शताब्दी में मध्यप्रदेश के खजुराहो में हुआ था. यह जैन मंदिर आदित्यनाथ जी को समर्पित है, परन्तु उन्नीसवीं शताब्दी में भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा स्थापित होने की वजह से लोग इस मंदिर को पार्श्वनाथ मंदिर भी कहते हैं. खजुराहो का यह मंदिर भारत में सबसे ज़्यादा देखे और घूमे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है. पार्श्वनाथ मंदिर भारतीय वास्तुकला का बेजोड़ नमूना रहा है.

राजस्थान के सिरोही जिले के मीरपुर में स्थित है. मीरपुर जैन मंदिर राजस्थान में मार्बल से बना सबसे पुराना मंदिर माना जाता है. इसका निर्माण 9वी शताब्दी में हुआ था. यह 1100 साल पुराना मंदिर है, जो भगवान पार्श्वनाथ जी को समर्पित है. इस मंदिर की लोकप्रियता इतनी है कि इस मंदिर का जिक्र ‘ वर्ल्ड एंड इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ आर्ट’ में भी है.

मार्बल से बना यह मंदिर जैन धर्म के सभी मंदिरों में से सबसे ज्यादा पूजनीय माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण देवी देवताओं के लिए हुआ है. इसी कारण इस मंदिर में रात के समय पर सोने की इजाज़त किसी को भी नहीं है. इस मंदिर में लोग पूजा अर्चना के लिए दुनिया भर से आते हैं.

जयपुर के अजमेर में बने नरेली जैन मंदिर के निर्माण की नींव 1994 में रखी गई थी. इस मंदिर के निर्माण में लगभग 100 करोड़ का खर्च आया था. यह मंदिर पूरे जयपुर में प्रसिद्ध है. इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं.