मुख्यपृष्ठ

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जी की जीवन-गाथा

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जी की जीवन-गाथा

भारत-भू पर सुधारस की वर्षा करने वाले अनेक महापुरुष और संत कवि जन्म ले चुके हैं, उनकी साधना और कथनी-करनी की एकता ने सारे विश्व को ज्ञान रूपी आलोक से आलोकित किया है, इन स्थितप्रज्ञ पुरुषों ने अपनी जीवनानुभव की वाणी से त्रस्त और विघटित समाज को एक नवीन संबल प्रदान किया है, जिसने राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और संस्कृतिक क्षेत्रों में क्रांतिक परिवर्तन किये हैं, भगवान राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, ईसा, हजरत मुहम्मदौर आध्यत्मिक साधना के शिखर पुरुष आचार्य कुन्दकुन्द, पूज्यपाद, मुनि योगिन्दु, शंकराचार्य, संत कबीर, दादू, नानक, बनारसीदास, द्यानतराय तथा महात्मा गाँधी जैसे महामना साधकों की अपनी आत्म-साधना...
स्थानकवासी संप्रदाय के श्रमण संघ के<br>आचार्य डॉ. शिवमुनि क्रांतीकारी संतपुरूष हैं

स्थानकवासी संप्रदाय के श्रमण संघ के
आचार्य डॉ. शिवमुनि क्रांतीकारी संतपुरूष हैं

सूरत: भारत की रत्नगर्भा वसुंधरा ने अनेक महापुरुषों को जन्म दिया है, जो युग के साथ बहते नहीं, बल्कि युग को अपने बहाव के साथ ले चलते हैं, ऐसे लोग सच्चे जीवन के धनी होते हैं। उनमें जीवन-चैतन्य होता है, वे स्वयं आगे बढ़ते हैं, जन-जन को आगे बढ़ाते हैं। उनका जीवन साधनामय होता है और जन-जन को वे साधना की पगडंडी पर ले जाते हैं, प्रकाश स्तंभ की तरह उन्हें जीवन पथ का निर्देशन देते हैं एवं प्रेरणास्रोत बनते हैं। आचार्य सम्राट डॉ. शिव मुनिजी महाराज एक ऐसे ही क्रांतिकारी महापुरुष एवं संतपुरुष हैं, जिनका इस वर्ष हीरक जयन्ती...
युगपुरूष राष्ट्रसंत प. पू. श्री. आनंदऋषिजी म.सा.<br>संक्षिप्त परिचय

युगपुरूष राष्ट्रसंत प. पू. श्री. आनंदऋषिजी म.सा.
संक्षिप्त परिचय

गुरू आनंद के पुण्य स्मृति पर हम सभी प्रेमी श्रावकगणधार्मिक भावोें के दीप जलायें, भवसागर से तिर जायेंहमने इस युग में चलते-फिरते तीर्थंकर के रूप में गुरूवरजी को देखा है, माना है। हमारे दु:ख, दर्द वो ही पहचाने हैं, उनको हम शीश झुकाकर त्रिवार वंदना कर आशिष चाहते हैं। गुरू आनंद की ज्योति हमें प्रकाश दिलाती है, जीवन जीने की राह दिखाती है। हमारी जीवन नैया मांझी बनकर पार लगाती है। आचार्य सम्राट प.पू. आनंद गुरूवर को पाकर यह धरा भी धन्य हो गयी। हमारे गुरूवर अंबर के भव्य दिवाकर थे। चांद से धवल किर्ती और मिश्री सी मिठी वाणी...
वर्धमान स्थानकवासी श्रमणसंघ के द्वितीय<br>राष्ट्रसंत आचार्यश्री आनंद ऋषिजी म.सा.

वर्धमान स्थानकवासी श्रमणसंघ के द्वितीय
राष्ट्रसंत आचार्यश्री आनंद ऋषिजी म.सा.

संसारी नाम – नेमीचंदजीपिता का नाम – श्री. देवीचंदजीसंसारी उपनाम – गुगलिया/गुगलेजन्म तिथि – श्रावण शुक्ल एकम्माता का नाम – श्रीमती हुलसाबाईजन्म स्थान – चिचोंडी, जिला. अहमदनगरआनंद ऋषिजी महाराज एक जैन धार्मिक आचार्य थे। भारत सरकार ने ९ अगस्त २००२ को उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया, उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्र संत की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया, वे वर्धमान स्थानकवासी श्रमण संघ के दूसरे आचार्य थे।प्रारंभिक जीवनउनका जन्म (श्रावण शुक्ल १ विक्रम संवत १९५७) को चिंचोड़ी, महाराष्ट्र में हुआ था और उन्होंने तेरह वर्ष की आयु में आचार्य रत्न ऋषिजी महाराज से दीक्षा...
७६वां स्वतंत्रता दिवस १५ अगस्त १९४७

७६वां स्वतंत्रता दिवस १५ अगस्त १९४७

स्वतंत्रता दिवस भारतीयों के लिये एक बहुत ही खास दिन है क्योंकि, इसी दिन वर्षों की गुलामी के बाद ब्रिटिश शासन से भारत को आजादी मिली थी। भारतीय स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक और महत्वपर्ू्ण दिन के बारे में अपनी वर्तमान और आने वाली पीढियों को निबंध लेखन, भाषण व्याख्यान और चर्चा के द्वारा प्रस्तुत करते हैं।१५ अगस्त १९४७, भारतीय इतिहास का सर्वाधिक भाग्यशाली और महत्वपर्ू्णं दिन था, जब हमारे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर भारत देश के लिये आजादी हासिल की। भारत की आजादी के साथ ही भारतीयों ने अपने पहले प्रधानमंत्री का चुनाव पंडित...