चिकपेट मंदिरजी में मनाई सातवीं वर्षगांठ, आठवां हुआ ध्वजारोहणम

चिकपेट मंदिरजी में मनाई सातवीं वर्षगांठ, आठवां हुआ ध्वजारोहणम
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बेंगलोर: चिकपेट स्थित श्री आदिराज जैन श्वेताम्बर मंदिर की सातवीं वर्षगांठ पर आठवां ध्वजारोहण कार्यक्रम आचार्य श्री चन्द्रभूषण सूरीश्वरजी म.सा., आचार्य श्री जिनसुन्दरसूरीजी म.सा., साध्वीजी श्री संवेगरत्नाश्रीजी म.सा. की निश्रा में मनाया गया। अमर ध्वजा लाभार्थी श्रीमती भंवरीबाई घेवरचंदजी सुराणा, दिलीप-अर्चना, आनंद-मोनिका सुराणा परिवार ने गाजे-बाजे के साथ चिकपेट मंदिर पहुॅचे।सत्तरभेदी पूजा महत नौवीं पूजा में विधि-विधान एवं आचार्यों के वासक्षेप द्वारा हर्षाल्लास से ऊँ पुण्याहां पुण्याहां प्रियताम प्रियताम आदि मंत्रोच्चार के जयघोष के साथ मंदिरजी के शिखर पर ध्वजारोहण शुभ मुर्हत में किया गया। आचार्य श्री चन्द्रभूषण सूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि ध्वजारोहण का लाभ सुराणा परिवार ने लिया, पुण्यशाली परिवार को ही ऐसे लाभ मिलते हैं, साथ ही ध्वजारोहण के समय उपस्थित श्रद्धालुओं को भी पुण्य मिलता हैं। आचार्य श्री जिनसुन्दरसुरीजी ने कहा आज के वास्तुपाल-तेजपाल जैसे दिलीपभाई-आनन्दभाई को सम्बोधित करते हुए प्रेरणा दी कि जब तक संयम न मिले तब तक कोई वस्तु का त्याग करे खुद संयम न ले सकें तो १०८ दीक्षार्थी को दीक्षा दिलवाएं, सभी ने एक वस्तु के त्याग का पच्चखान लिया। संघ अध्यक्ष प्रकाशजी राठोड ने सबका स्वागत किया। सचिव अशोक संघवी ने विचार व्यक्त किए, इस अवसर बाबुलालजी पारेख, गौतमजी सोलंकी, भंवरलालजी कटारिया, देवकुमार के. जैन सहित अनेक ट्रस्टीगण श्रद्धालु उपस्थित थे। पूजा श्री विजयलब्धि जैन संगीत मंडल द्वारा व्यवस्था श्री आदिनाथ जैन सर्वोत्तम सेवा मंडल द्वारा विधि विधान सुरेन्द्र सी.शाह गुरूजी, प्रवीण गुरूजी द्वारा करवाया गया।

– देवकुमार के. जैन

कर्नाटक में मिली अद्भुत एवं अलौलिक जैन प्रतिमा
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हलिंगली (कर्नाटक): हलिंगली में खुदाई के दौरान प्राचीन जैन प्रतिमा प्राप्त भगवान आदिनाथजी व भगवान महावीर जी की संयुक्त आधा बैलमुख व आधा शेरमुख चिन्ह युक्त लगभग दूसरी या तीसरी सदी की भारत में पहली बार इस तरह की ‘आदिवीर’ भगवान की प्राचीन प्रतिमा मिली है, इससे पूर्व में भी यहां से प्राचीन प्रतिमाएं प्राप्त हो चुकी है। संभवत: यहां प्राचीन समय में विशाल जिनालय होगा, इसी स्थान से एक शिलालेख भी प्राप्त हुआ था जिसमें आचार्य भद्रबाहु के साथ चंद्रगुप्त मौर्य उत्तर से दक्षिण भारत की और विहार करते समय चातुर्मास किए जाने का उल्लेख है। सूचना प्रदाता-संजय जैन आचार्य कुलरत्नभूषण महाराज के अनुसार इसके पहले भी यहां पर १६ पुरानी प्रतिमा मिल चुकी हैं और वो सारी प्रतिमा आचार्य श्री कुलरत्न भूषण अतिशयकारी प्रतिमा है जिसको आदिवीर भगवान के नाम से जाना जाता है। जय हो आदिवीर भगवान की! जय हो कुलरत्न भूषण मुनिराज की!

झारखंड के मुख्यमंत्री जैन मुमुक्षुओं को आशीर्वाद देगें
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मुंबई: झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवरदास ने जैन धर्म के ४० अनुयायियों (मुमुक्षु) को अपने आवास पर आमंत्रित किया, वे अनुयायी जैन धर्म के अनुसार संसार को त्यागकर मार्च २०१९ में मुंबई में सामूहिक दीक्षा लेंगे। झारखंड के मुख्यमंत्री की जैन धर्म के अनुयायियों के साथ संयुक्त रूप से बैठक करीब २ घंटे चली, जिसके बाद उन्होंने सभी अनुयायियों का सम्मान किया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने धर्म के प्रमुख सिद्धांतों, संयम, तप, त्याग की सराहना की, जो दीक्षा की बुनियाद है, उन्होंने ४० मुमुक्षुओं का सम्मान करते हुए झारखंड सरकार की ओर से बधाई पत्र और सफ़ेद रंग की साटन की वेशभूषा दी, उन्होंने जैन धर्म के अनुयायियों को झारखंड सरकार की ओर से सामूहिक दीक्षा लेने के लिए और उनके गुरुदेव जैनाचार्य जिनचंद्र सूरी जी और जैनाचार्य श्री योगतिलक सूरीजी को शुभकामनाएं दी, सभी दीक्षार्थियों (मुमुक्षुओं) के लिए मुख्यमंत्री के आवास पर भोजन तैयार किया गया था, भोजन को जैन धर्म सिद्धांतों के अनुसार परोसा गया। आध्यात्म परिवार की ओर से शासनरत्न हितेश भाई मोटा ने झारखंड सरकार और मुख्यमंत्री को पवित्र तीर्थ श्रीसमेतशिखरजी की पवित्रता बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया। जैन धर्म की दीक्षा और धर्म के प्रति अत्यधिक सम्मान प्रदर्शित करने और जैनधर्म की विचारधारा का संज्ञान लेने के लिए उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया, द्वय गुरुवर ने मुख्यमंत्री को मुंबई में १३ मार्च २०१९ को होने वाली ४० सामूहिक दीक्षा में भाग लेने और अपना आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया।

बेंगलोर में जे.सी.आई द्वारा बहुमान
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बेंगलोर: बसवनगुडी स्थित ऋषभ गोयम कृपा पर जूनीयर चेम्बर इन्टरनेशनल (जे.सी.आई) बेंगलोर द्वारा डायरेक्टर सुरेशकुमार देवकुमारजी गादिया का बहुमान कर मोमेन्टों भेंट दिया गया। जे.सी. आई. में गत वर्ष के दौरान कम्यूनिटी डेवलपमेन्ट, बिजनेश डेवलपमेन्ट, न्डिवीयन डेवलपमेन्ट कार्यक्रमों के दौरान जिन-जिन बोर्ड मेम्बरों का सहयोग सराहनिय रहा, उनको प्रोत्साहन हेतु बहुमान कर मोमेन्टो दिया जाता है, इस अवसर पर देवकुमार के. जैन, जे.एफ.सी. अध्यक्ष मुकेश भंडारी, जेसीआई (सीडी) उपाध्यक्ष राकेश मेहता, जेसीआई (लोभ) उपाध्यक्ष ऋषभ पनानी, डाईरेक्टर अंकीत जैन सहित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

– देवकुमार के. जैन

विलुप्त होता जैन इतिहास

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अढाई दिन का झोपड़ा- राजस्थान, अजमेर में स्थित मस्जिद, इसका निर्माण मोहम्मद गोरी के आदेश पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने वर्ष ११९२ में किया था, जिसके लिए एक भव्य जैन मंदिर तोड़ा गया था।

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कुतुबमीनार-ईसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने ११९३ में शुरू करवाया था, इसके पूर्व दरवाजे पर एक पर्शियन लेख है जिसमें लिखा है कि २७ हिंदू और जैन मंदिर तोड़कर कुतुब मीनार बनाया गया है।

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टिपू सुलतान द्वारा केरल पर आक्रमण कर ध्वस्त किया गया जैन मंदिर, गांव- पन्नमारम, जिला- वायनाड, केरल।

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जामा मस्जिद- दौलताबाद स्थित एक मस्जिद, इसका निर्माण १३१८ में जैन मंदिर तोड़कर किया गया था।

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देवल मस्जिद, निजामाबाद-९ वीं सदी में मूहम्मद बिन तुगलक द्वारा जैन मंदिर तोड़कर बनाई गई मस्जिद

जैन धर्म का सुरक्षात्मक भविष्य के लिए जैन एकता जरूरी -बिजय कुमार जैन ‘हिंदी सेवी’

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ तप

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प्रतापगढ़ शहर में जैन श्राविका ने १३१ दिन तक उपवास कर अपना नाम गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्डस में दर्जा करवाया, प्रतापगढ़ में चिपढ़ परिवार की बहू मोनिका ने ४ माह और ११ दिनों तक कुछ नहीं खाया, वे सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले गर्म पानी पर आश्रित रही, इस रिकॉर्ड तपस्या के लिए उनका नाम गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्डस में दर्ज किया गया है, इसके पहले यह कीर्तिमान रतलाम की निर्मला नाहर के नाम था, जिन्होंने १२५ उपवास की तपस्या की थी।
विभिन्न सामाजिक संगठनों और धार्मिक संगठनों की ओर से तपस्वी ३२ वर्षीय मोनिका का अभिनंदन किया गया। साधुमार्गी जैन श्रावक संघ की ओर से आयोजित किए गए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रतलाम, नीमच, मंदसौर, दिल्ली, मुंबई, जयपुर आदि स्थानों से आए जैन धर्मावलंबियों ने भाग लिया। तप अभिनंदन समारोह के कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कलक्टर हेमेंद्र नागर, नगर परिषद सभापति कमलेश डोसी सहित कई जैन संघों के प्रतिनिधि मौजूद थे। अतिरिक्त जिला कलक्टर हेमेंद्र नागर ने इस मौके पर कहा कि संख्या गिनना भी भारी लगता है ऐसे मे मोनिका की ओर से इस प्रकार के तप की आराधना करना वास्तव में तपस्या की पराकाष्ठा है। गौरतलब है कि जैन धर्म में तपस्या का विशेष महत्त्व है १०,२०,३० दिनों की उपवास की तपस्या कई श्रद्धालु करते रहते हैं, लेकिन इतनी लंबी तपस्या अपने आप में एक कीर्तिमान है।
आस्था का प्रभाव : इस मौके पर मौजूद गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्डस के प्रतिनिधी मनोज शुक्ला ने कंपनी की ओर से प्रमाण पत्र दिया, उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस के मुताबिक इस तरह निराहार रहकर तपस्या करना शरीर को काफी कमजोर करता है, लेकिन इसे आस्था और धर्म का प्रभाव ही कहा जा सकता है कि इतने दिन भूखे रहकर भी स्वस्थ रहा जा सकता है।

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