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Jinagam Magazine

जीतो कोयम्बतूर

‘जीतो’ कोयम्बतूर की नई समिति का गठन कोयम्बतुर: भारत में समाज कल्याण की अग्रणीय संस्था जैन इन्टरनेशनल ट्रेड ऑर्गनिजेशन ‘जीतो’ कोयम्बतुर की नई समिति घोषित की गई। निवनिर्वाचित चेयरमेन रमेश बाफना ने पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए आगामी वर्ष में होने वाले कार्यक्रमों की रूप रेखा प्रस्तुत की। श्री बाफना ने जीतो कोयम्बतूर को नई उँचाइयों पर ले जाने हेतु सभी से सहयोग का आव्हान किया। नई समिति के पदाधिकारी बने चेयरमेन-श्री रमेश बाफना, कोचेयरमैन-श्री राकेश मेहता, महामंत्री श्री सम्पत पारेख, मंत्री-श्री भेरू जैन, श्री अलकेश सेठ, कोषाध्यक्ष-श्री जम्बु कुमार, सहकोषाध्यक्ष-श्री प्रदीप कवाड़। ‘जीतो’ कोयम्बतूर महामंत्री श्री सम्पत पारेख ने...

महामंत्र णमोकार

श्री विद्यासागर पाठशाला द्वारा संचालित महामंत्र णमोकार तीर्थंकर केवली के भेद तथा तीर्थंकर प्रकृति की बंध व्यवस्था किस प्रकार की है, इसका वर्णन किया जा रहा है। अरिहंतों अर्थात् केवली के कितने भेद होते हैं? अरिहंतों अर्थात् केवली के दश भेद होते हैं। (१) तीर्थंकर केवली के तीन भेद होते हैं। (१) पांच कल्याणक वाले तीर्थंकर केवली । जिन जीवों के पूर्वभव में ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध हो गया है, उन जीवों के नियम से गर्भ कल्याणक, जन्म कल्याणक, तप कल्याणक, ज्ञान कल्याणक और निर्वाण (मोक्ष) कल्याणक यह पांचों कल्याणक होते हैं। गर्भ कल्याणक, जन्म कल्याणक, तप कल्याणक, केवलज्ञान...
महिला शिक्षा की जननी महिलारत्न पं. चंदाबाई जी

महिला शिक्षा की जननी महिलारत्न पं. चंदाबाई जी

महिला शिक्षा की जननी महिलारत्न पं. चंदाबाई जी : माँ-श्री महिलारत्न पं.चंदाबाई जी का जन्म वि. सं.१९४६ की आषाढ-शुक्ल तृतीया की शुभ बेला में वृंदावन में हुआ था। बारह वर्ष की आयु में आपका शुभ विवाह संस्कार आरा नगर के प्रसिद्ध जमींदार जैन धर्मानुयायी पं. प्रभुदास जी के पौत्र श्री चंद्रकुमार जी के पुत्र श्री धर्मकुमार के साथ सम्पन्न हुआ था। बाबू धर्मकुमार जी की मृत्यु विवाह के कुछ समय बाद ही हो गई। मात्र तेरह वर्ष की अवस्था में ही वैधव्य की वैधवीकला ही आपकी चिरसंगिनी बनी। आपके जेठ देव प्रतिमा स्वनामधन्य बाबू देवकुमार जी ने अपनी अनुज वधू...

देवभूमि बिहार का देव परिवार

बिहार के जैन तीर्थक्षेत्रों, जैन संस्थानों एवं जैन गतिविधियों की चर्चा हो एवं आरा के प्रसिद्ध जैन धर्मावलंबी देव परिवार के योगदान का स्मरण न हो, ऐसा संभव ही नहीं। जैन जागृति के अग्रदूतों में इस परिवार की सात पीढ़ियों के यशस्वी/गुणीजनों का समावेश अपने आप में एक उपलब्धि है, जिसे इतिहास से विस्मृत नहीं किया जा सकता। आरा (बिहार) के सुप्रसिद्ध देव परिवार के पूर्व पुरुष अग्रवाल कुलोत्पन गोयल गोत्रीय काष्ठासंघ के पं. प्रवर प्रभुदास जी आज से करीब २०० वर्ष पूर्व अपने परिवार के साथ बनारस में धर्मध्यान किया करते थे। वे संस्कृत व प्राकृत के प्रकांड विद्वान...
गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरिश्वरजी

गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरिश्वरजी

जन्मस्थान एवं माता-पिता-परिवार ‘श्रीराजेन्द्रसुरिरास’ एवं श्री राजेन्द्रगुणमंजरी के अनुसार, वर्तमान राजस्थान प्रदेश के भरतपुर शहर में दहीवाली गली में पारिख परिवार के ओसवंशी श्रेष्ठि ऋषभदास रहते थे, आपकी धर्मपत्नी का नाम केशरबाई था, जिसे अपनी कुक्षि में श्री राजेन्द्र सुरि जैसे व्यक्तित्व को धारण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। श्रेष्ठि रुषभदास जी की तीन संतानें थीं, दो पुत्र : बड़े पुत्र का नाम माणिकचन्द एवं छोटे पुत्र का नाम रतनचन्द था एवं एक कन्या थी, जिसका नाम प्रेमा था, छोटा पुत्र रतनचन्द आगे चलकर आचार्य श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरि नाम से प्रख्यात हुए। गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरिश्वरजी वंश...