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Jinagam Magazine

इंडिया नहीं भारत बोलें सभा सम्पन्न

  इंडिया नहीं भारत बोलें सभा सम्पन्न सत्य, अहिंसा और विश्व शांति के अग्रदूत जन-जन के आराध्य वर्तमान शासन नायक श्री १००८ तीर्थंकर महावीर की २६२० वीजन्म कल्याणक दिनांक २५ अप्रैल २०२१ के पावन स्वर्णिम अवसर पर ‘मैं भारत हूँ’ संघ के तत्वाधान में एक भव्य वेबीनार काआयोजन कर किया गया। वेबीनार के प्रारंभ में मंगलाचरण पाठ राष्ट्रीय संवाददाता पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ पत्रकार कोटाराजस्थान में अपनी सुमधुर आवाज में सभी को भावविभोर कर दिया। संघ के अध्यक्ष बिजय कुमार जैन मुंबई ने बताया कि इसअवसर पर जैन धर्म और देश के विकास के लिए काम करने वाले नवरत्नों को सम्मानित...
तेरापंथ की अनमोल बातें

तेरापंथ की अनमोल बातें

तेरापंथ की अनमोल बातें : तेरापंथ की स्थापना हुई- आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा, संवत् १८१७, केलवा (राजस्थान)। तेरापंथ के प्रथम साधु- मुनि थिरपालजी, जिन्होंने संघ की नींव को स्थिर बनाया। तेरापंथ की प्रथम साध्वी- साध्वी कुशालांजी। तेरापंथ की स्थापना के बाद संघ में दीक्षित होने का सौभाग्य मिला साध्वीत्रय को- साध्वी कुशालां जी, मट्टू जी एवं अजबू जी। तेरापंथ का प्रथम मर्यादा पत्र (संविधान) लिखा गया- मृगसर कृष्णा ७, संवत् १८३२। आखिरी मर्यादा पत्र (संविधान) लिखा गया- आचार्य भिक्षु द्वारा माघ शुक्ला ७, संवत् १८५३। हाजरी वाचन का प्रारम्भ हुआ – श्रीमज्जयाचार्य द्वारा पौष कृष्णा संवत्‌ १९१० (रावलियां)। सेवा केन्द्र की...
सीहोर में मिली पार्श्वनाथ जी की अति प्राचीन प्रतिमा

सीहोर में मिली पार्श्वनाथ जी की अति प्राचीन प्रतिमा

सीहोर में मिली पार्श्वनाथ जी की अति प्राचीन प्रतिमा : सीहोर: मध्यप्रदेश का राजधानी भोपाल के नजदीक सीहोर जिले की सीवन नदी के किनारे चौधरी घाट पर २३वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी की सर्वांग सुंदर प्रतिमा प्राप्त हुई हैं। सीहोर शासकीय महाविद्यालय में प्रोफेसर श्री गणेशी लाल जैन व जैन समाज के अध्यक्ष श्री अजय जैन ने बताया कि प्रतिमा को चौधरी घाट से उठाकर श्री दिगम्बर जैन मंदिर सीहोर में लाकर साफ सफाई की गई।प्रतिमा ९वीं शताब्दी की प्रतीत होती हैं।प्रतिमा पद्मासन होकर पांच फन युक्त व यक्ष यक्षिणी सहित है। प्रतिमा प्राप्त होने से जैन समाज में उत्साह...
जैन एकता है जरुरी

जैन एकता है जरुरी

जैन एकता का प्रश्न खड़ा है सबके सम्मुख हल अभी तक क्यों कोई खोज नहीं पाया है अनेकता में एकता की बात हम कैसे कहें अलग-अलग पंथ का ध्वज हमने फहराया है गुरुओं ने अपने-अपने कई पंथ बना लिए महावीर के मूल पथ को सभी ने बिसराया है ‘संवत्सरी’ को भी हम अलग-अलग मनाते सभी एकता का भाव कहां मन में समाया है संगठन में ही शक्ति है ये क्यों नहीं विश्वास हमें भविष्य के अंधेरे का होता क्यों नहीं आभास हमें टूट टूट कर बिखर जाएंगे वे दिन अब दूर नहीं खतरे की घंटियों का क्यों नहीं अहसास हमें...
तीर्थंकर महावीर स्वामी का संक्षिप्त जीवन परिचय

तीर्थंकर महावीर स्वामी का संक्षिप्त जीवन परिचय

तीर्थंकर महावीर स्वामी का संक्षिप्त जीवन परिचय :पूरे भारत वर्ष में महावीर जन्म कल्याणक पर्व जैन समाज द्वारा उत्सव के रूप में मनाया जाता है। जैन समाज द्वारा मनाए जाने वाले इस त्यौहार को महावीर जयंती के साथ-साथ महावीर जन्म कल्याणक नाम से भी जानते हैं, महावीर जन्म कल्याणक हर वर्ष चैत्र माह के १३ वें दिन मनाई जाती है, जो हमारे वर्किंग केलेन्डर के हिसाब से मार्च या अप्रैल में आता है, इस दिन हर तरह के जैन दिगम्बर-श्वेताम्बर आदि एकसाथ मिलकर इस उत्सव को मनाते हैं, भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप में मनाए जाने वाले इस त्यौहार में भारत के...