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Jinagam Magazine
ओजस्वी सन्त तरूण सागरजी

ओजस्वी सन्त तरूण सागरजी

मध्यप्रदेश के दमोह के छोटे से ग्राम में जन्मा एक बालक कभी देश का इतना ओजस्वी व प्रखर वक्ता सन्त बन जायेगा, यह किसी की कल्पना में नहीं था। २६ जुन सन् १९६७ में जन्मा पवन कुमार जैन, अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान ही एक जैन सन्त का आध्यात्मिक प्रवचन सुनकर, मन से आन्दोलित हो गया एवं १४ वर्ष की उम्र में अपना घर छोड़ दिया, वह किशोर अगले ५-६ वर्ष अपनी ज्ञान-पिपासा की शान्ति एवं मानव जीवन का उद्देश्य पूर्ण सुख-शान्ति प्राप्ति हेतु गुरू की खोज करता रहा, अन्त में सन् १९८८ में २१ वर्ष की आयु में दिगम्बर...
आत्मविकास का अपूर्व अवसर : चातुर्मास

आत्मविकास का अपूर्व अवसर : चातुर्मास

प्रत्येक क्रिया काल के अनुसार करनी चाहिए-मनुष्य श्रम करता है किन्तु उसका फल पाने के लिए ‘काल’ की उपयुक्तता /अनुकूलता जरुरी है, जैसे स्वास्थ्य सुधारने के लिए सर्दी का मौसम अनुकूल माना जाता है, वैसे धर्माराधना और तप: साधना के लिए वर्षावास,चातुर्मास का समय सबसे अधिक अनुकूल माना जाता है। संपूर्ण सृष्टि के लिए वर्षाकाल सबसे महत्वपूर्ण है, इन महीनों में आकाश द्वारा जलधारा बरसाकर धरती की प्यास बुझाती है, धरती की तपन मिटाती है और भूमि की माटी को नम्र, कोमल, मुलायम बनाकर बीजों को अंकुरित करने के लिए अनुकूल बनाती है इसलिए २७ नक्षत्रों से वर्षाकाल के १०...
संसार का आठवाँ आश्चर्य जैन साधु

संसार का आठवाँ आश्चर्य जैन साधु

हमारे पूर्व जन्म की पुण्यायी के कारण हम इस जन्म में जैन कुल में पैदा हुए, जैन कहलाये तथा हमें जैन-सन्तों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। हमारे साधु-साध्वियों को संसार का आठवां आश्चर्य कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। गर्मी हो या सर्दी, सड़क हो या कच्चा रास्ता, कंकर हो या कांटे, रात्रि भोजन व कच्चे पानी का त्याग, बरसात में छाता नहीं, ओढ़ने के लिए चादर या कम्बल नहीं, रात्रि में मच्छर काटते हैं, बिजली का उपयोग नहीं, दो-तीन जोड़ी पतले कपड़ों से सम्पूर्ण जीवन व्यतित करना तो आश्चर्य ही है। हम एक दिन भी इस तरह का जीवन जी...

दिल्ली में तपस्वियों का सम्मान​

दिल्ली: दिनांक ३० सितम्बर को बड़ी श्रद्धा एवं हर्षोल्लास से उपाध्याय श्री गुप्तिसागर जी म.सा. का ३७ वाँ दीक्षा समारोह सम्पन्न हुआ, इस अवसर पर क्षमावाणी महापर्व का भी आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली में १० उपवास व इससे अधिक उपवास करने वालों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, कार्यक्रम में ३१०८ यात्रियों को श्री सम्मेद शिखर जी की यात्रा के टिकट वितरित किए गए, इस अवसर कई गणमान्यों के साथ ही केंद्रीय विज्ञान प्रोद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन व दिल्ली के स्वास्थ मंत्री सत्येन्द्र जैन भी उपस्थित थे, जिन्होंने सभा को सम्बोधित भी किया। एकता में शक्ति मुझे जिनागम...
तेरापंथ स्थापना दिवस पर कहा रहे

तेरापंथ स्थापना दिवस पर कहा रहे

तेरापंथ की फुलवारी सदा हरी-भरी – शासनश्री मुनि विजय कुमार यह जगत् द्वन्द्वात्मक है, अनेक प्रकार के विरोधी द्वन्द्व हमें यहां देखने को मिलते हैं, दिन-रात, सर्दी-गर्मी, मृदु-कठोर आदि द्वन्द्वों की तरह ही कभी पतझड़ तो कभी वसंत के दर्शन यहां होते रहते हैं, यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसे कोई रोक नहीं सकता, व्यक्ति और समूह दोनों में यह विविधता दिखाई देती है, अनुकूल परिस्थिति घटित होने पर व्यक्ति को लगता है ‘अच्छे दिन आ गये’ और प्रतिकूलता घटित होने पर लगता है ‘अच्छे दिन चले गये’। समय के बदलाव के साथ व्यक्ति की सोच में भी बदलाव परिलक्षित...